” अरपा अर्पण महा अभियान”राजनीतिक माहौल से अलग अरपा, पौधे व पर्यावरण को बचाने में जुटा सच्चे सेवकों का एक समूह

बिलासपुर। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक तरफ शहर में राजनीतिक माहौल सरगर्म है। प्रायः हर कोई किसी न किसी रूप में चुनाव में व्यस्त है। लेकिन इस व्यस्तता और शोरगुल के बीच दूसरी तरफ एक ऐसा तबका भी है, जो पेड़-पौधों, पर्यावरण और अस्तित्व के संकट का सामना कर रही अरपा की चिंता कर रहा है। इसे बचाने के लिए जी जान से जुटा है।

यह कोई राजनीतिक प्रयास नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से समाज से जुड़े उन चुनिंदा जागरूक युवाओं, महिलाओं का बेहतरीन कार्य है जो अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है। इस कार्य में वरिष्ठ नागरिक भी महती भूमिका निभा रहे हैं। कोई ये न समझे कि इनके पास कोई काम नहीं है, इसलिए ये समय काट रहे, बल्कि ये जान लें कि इस समूह से जुड़े सभी लोग बेहद मशरूफ हैं। कोई शासकीय सेवक है, तो कोई व्यवसायी, स्टूडेंट, गृहणी या दीगर कार्य करता है। इसके बावजूद इस ग्रुप के लोग तड़के सुबह हाथ में गैंती-फावड़ा और घमेला लेकर अरपा किनारे पहुंच जाते हैं। वे पौधे लगाते है, इनका संरक्षण भी करते हैं। पौधों के लिए क्यारियां बनाते हैं और पाइप-मोटर लेकर खुद ही पौधों की सिंचाई करते हैं।

इन सारे संसाधनों को जुटाने के लिए भी इन्होंने शासन-प्रशासन या राजनीतिक सहयोग नहीं लिया, बल्कि इस ग्रुप के लोगों ने यह संसाधन खुद के पैसों से जुटाए, यानी पर्यावरण के प्रति इनकी फिक्र ऐसी कि तन-मन और धन से सेवा कर रहे हैं। इस समूह ने अपना एक वाट्सएप ग्रुप बना रखा है, “अरपा अर्पण महा अभियान” के नाम से। इसी जरिए ग्रुप के लोगों को सूचना प्रसारित की जाती है।

आज ये किया :-

रविवार को मां अरपा के सेवा का कार्य अपने निर्धारित समय पर आरंभ हुआ। पंप, पाइप व अन्य सामान मां सर्वेश्वरी आश्रम से लाकर फेस 3 व 4 मे लगे प्रत्येक पौधों को पानी से सराबोर कर दिया गया। नए पाइप को जोड़कर काम करने मे आसानी हुई जो पानी व्यर्थ जाता था उसकी बचत हुई। क्यारियों का निर्माण भी किया गया, पौधों के बीच नालियों का भी निर्माण किया गया। विगत दो सप्ताहों से पानी की आपूर्ति पौधों को बहुत अच्छे से मां अरपा की कृपा से हो पा रहा।
आज की सेवा में जगजीत अंकल, वर्मा सर, जय भैया, दिग्विजय भैया, अमित भैया, बसंत भैया, राजु भैया, मनीष भैया, निशिथ भैया, वर्षा दीदी, अनुराग मिश्रा, उपेन्द्र भाई, सुमित भाई , अभिषेक ठाकुर, निरज भाई , पीयूष भाई, अभिषेक तिवारी, प्रकाश भाई व श्याम उपस्थित हुए।

मौसमी प्रयास करने वाले नदारद:-

यूं तो पौधों और पर्यावरण की चिंता करने वाले और भी लोग हैं, लेकिन अधिकांश सिर्फ श्रेय लेने तक ही सीमित रह जाते हैं। केवल दो-चार दिन के लिए। बाकी समय उनका भी पता नहीं रहता, जो वर्षों से अरपा को संवारने का सिर्फ सपना दिखा रहे। बातों-बातों में करोड़ों रुपए खर्च भी हो गए, लेकिन काम एक ढेले का नहीं हुआ। हर साल लाखों पौधे रोपने के दावे करने वाले उन अफसरों का भी पता नहीं है।

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