आंवला नवमी: उद्यानों में परिवार के साथ पहुंचे लोग, आंवले के पेड़ की विधि विधान से पूजा कर लगाया भोग, जानिए कैसे हुई आंवले की उत्पत्ति

0 इस दिन संतान की मंगलकामना के लिए की जाती है पूजा

बिलासपुर। शनिवार को आंवला नवमी मनाया गया। महिलाओं ने विधि विधान से परिक्रमा कर आंंवले के पेड़ की पूजा करते हुए अपने संतान व परिवार के लिए मंगल कामना की। इसके लिए शहर के विवेकानंद उद्यान, दीन दयाल गार्डन व अन्य उद्यानों सहित पेंडारी कानन में भी काफी संख्या में लोग परिवार के साथ पहुंचे थे। पूजा-पाठ व भोग के बाद सभी ने आंवले के पेड़ के नीचे परिवार सहित भोजन ग्रहण कर पिकनिक का आनंद लिया।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला अक्षय नवमी कहते हैं। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। इस बार ये पर्व 17 नवंबर शनिवार को पड़ा। यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भारतीय संस्कृति का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है। मान्यता के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और उनकी मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं।

कैसे हुई आंवला की उत्पत्ति

मान्यता के अनुसार, जब पूरी पृथ्वी जलमग्न थी और इस पर जिंदगी नहीं थी, तब ब्रम्हा जी कमल पुष्प में बैठकर परब्रम्हा की तपस्या कर रहे थे। वह अपनी कठिन तपस्या में लीन थे। तपस्या करते.करते ब्रम्हा जी की आंखों से ईश.प्रेम के अनुराग के आंसू टपकने लगे थे। ब्रम्हा जी के इन्हीं आंसूओं से आंवले का पेड़ उत्पन्न हुआ, जिससे इस चमत्कारी औषधीय फल की प्राप्ति हुई। इस तरह आंवला वृक्ष सृष्टि में आया।

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