कांग्रेसी घोषणा पत्र से सियासत में मची खलबली, विरोधियों ने मीडिया प्रभारी त्रिवेदी के नाम से वायरल कर दिया फर्जी पत्र, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत

रायपुर। लगता है कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र विरोधी दलों को भारी पड़ रहा है। यही वजह हो सकती है, कि किसानों से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं करने के खिलाफ अब किसी विरोधी दल या व्यक्ति ने कर्ज माफी से संबंधित एक फर्जी पत्र तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। यह फर्जी पत्र प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी शैलेष नितिन त्रिवेदी के नाम से जारी कर वायरल किया गया है। इस पत्र ने प्रदेश के सियासी गलियारे में खलबली मचा दी है। कांग्रेस ने इस मामले की लिखित शिकायत मुख्य निर्वाचन अधिकारी से की है। कांग्रेसियों ने निर्वाचन कार्यालय के समक्ष धरना देकर भी नाराजगी जताई।

ये है मामला

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि सरकार बनने के 10 दिनों के अंदर प्रदेश के सभी किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। साथ ही धान का समर्थन मूल्य 2500 रूपए प्रति क्विंटल रखा जाएगा। धान पर बोनस देने के साथ ही भाजपा सरकार की घोषणा के बावजूद दो साल के बोनस की बकाया राशि भी दी जाएगी। कांग्रेस की यह घोषणा विरोधी दलों को भारी पड़ रही है।

फर्जी घोषणा पत्र में कुछ ऐसा लिखा गया…

इसी घोषणा पत्र के विपरीत फर्जी पत्र में कुछ ऐसा लिखा गया- ” 2 एकड़ से अधिक भूमि वाले को कर्ज माफी नहीं, फसल बीमा का लाभ लेने वाले किसानों को कर्ज माफी नहीं, अधिकतम 20 हजार तक ही कर्ज माफी, आदि….।

कांग्रेस ने ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया-

कांग्रेस का कहना है कि फर्जी पत्र में कहा गया है कि घोषणा का लाभ सभी किसानों को नहीं मिलेगा। जबकि कांग्रेस ने इस संबध में अब तक न तो कोई घोषणा की है न कोई पत्र जारी किया गया है।

भाजपा का हाथ है-कांग्रेस

कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन ने निर्वाचन पदाधिकारी को साैंपे गए अावेदन में कहा है कि सत्तारूढ़ भाजपा की अोर से किसानों को भ्रमित करने के उद्देश्य से एेसा किया गया है। पत्र में शैलेष नितिन त्रिवेदी अध्यक्ष संचार समिति का नाम है जबकि पत्र में हस्ताक्षर गिरीश देवांगन के नाम से किए गए हैं। पत्र में नाम शैलेष का पता गिरीश देवांगन के घर का है। कांग्रेस ने कहा है कि इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा 28 अक्टूबर,17 नवंबर, अौर 18 नवंबर को भी किया गया है। कांग्रेस ने ताजा मामले में अपराध दर्ज करने की मांग की है।

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