स्वास्थ्य विभाग में चल रही भर्राशाही का बड़ा मामला खुला: ढाई साल पहले तबादला हुआ, 2 साल पहले रिलीव भी कर दिए गए लेकिन डॉक्टर ने आज तक नहीं दी जॉइनिंग, अफसर से सेटिंग कर जमे हुए हैं पचपेड़ी में, नियम विरुद्ध वेतन भी पा रहे

खबरची, बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग में ऐसी भर्राशाही मची है कि डॉक्टर और अधिकारी शासन का आदेश तक नहीं मान रहे, बल्कि शासन की आंखों में धूल झोंककर नियम विरुद्ध वेतन निकाल रहे हैं। पचपेड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक डॉक्टर का ढाई साल पहले गौरेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए तबादला हुआ लेकिन डॉक्टर ने आज तक वहां जॉइनिंग नहीं दी, बल्कि विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ करके आज तक पचपेड़ी में ही जमे हुए हैं। इतना ही नहीं, उन्हें नियम विरुद्ध वेतन भी दिया जा रहा।

स्वास्थ्य विभाग में लगातार कई घोटाले सामने आए हैं। कभी करोड़ों का पेट्रोल-डीजल घोटाला, तो कभी भर्ती और जीवनदीप समिति की राशि मे घोटाला, कभी मलेरिया दवा छिड़काव के नाम पर घोटाला। घोटालों का अड्डा बने स्वास्थ्य विभाग में फिर एक नया कारनामा सामने आया है। पचपेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. संतोष कुमार सिन्हा का 30 जुलाई 2016 को गौरेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए स्थानांतरण किया गया था, लेकिन डॉ. सिन्हा ने आज तक वहां जॉइनिंग नहीं दी।

2 साल पहले किया जा चुका रिलीव :-

हैरत की बात यह है उन्हें यहां से 17 अक्टूबर 2016 को रिलीव भी किया जा चुका है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों की शह पर वहां अंगद की तरह अपने पांव जमाए हुए हैं।

अफसर की भूमिका भी संदिग्ध:-

मालूम हो कि गौरेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है और क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार मांग करते रहे हैं। इसके बावजूद रिलीव किए गए डॉक्टर को नियम विरुद्ध 2 साल तक रोककर रखना, वेतन देना और संबंधित स्थान पर जॉइनिंग के लिए न कहना विभागीय अफसरों की भूमिका को संदिग्ध बनाता है।

संभागायुक्त व स्वास्थ्य संचालक से हो चुकी शिकायत:

मामले की शिकायत संभागायुक्त व स्वास्थ्य संचालक तक से हो चुकी है, लेकिन विभागीय अफसरों व डॉक्टर को इसकी कोई परवाह नहीं।

सीएमएचओ का हास्यास्पद बयान, कहते हैं चुनाव की वजह से रोक रखा था :-

इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. बीबी बोर्डे से बात की गई तो हास्यास्पद जवाब मिला। उन्होंने कहा, चुनाव की वजह से डॉ. सिन्हा को पचपेड़ी में रोका गया था। अब उन्हें जॉइनिंग के लिए जल्द ही गौरेला भेज रहे हैं। यानी सीएमएचओ की मानें तो डॉ. सिन्हा तकरीबन ढाई साल से चुनाव ड्यूटी कर रहे हैं। या फिर चुनाव मैनेज कर रहे हैं।

इसका जवाब नहीं दे सके सीएमएचओ :-

  • डॉक्टर संतोष कुमार सिन्हा का 28 माह पहले तबादला हुआ, उन्होंने अब तक गौरेला में जॉइनिंग क्यों नहीं दी?
  • उन्हें रिलीव किए 2 साल से अधिक गुजर चुके, फिर भी वे पचपेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में ही क्यों जमे हुए हैं?
  • शासन के आदेश की लगातार अवहेलना, और स्थानांतरित कार्यस्थल पर जॉइनिंग नहीं देने पर भी उन्हें वेतन किस तरह मिल रहा?
  • यदि ढाई साल तक डॉ. सिन्हा ने जॉइन नहीं किया। शासकीय आदेश की लगातार अवहेलना की, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

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