नए राजनीतिक परिदृश्य की दो अलग-अलग तस्वीरें: विधायक बनने के बाद सक्रियता कम हुई, अधिक सक्रिय दिखाई पड़ रहे महापौर

खबरची, बिलासपुर। विधानसभा चुनाव के पहले और अब के हालात अलग-अलग हैं। राजनीतिक नजरिए से शहर की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। नए परिवेश में शहर के दो शीर्ष नेताओं की भूमिका पर भी लोगों की नजर है, एक तो हमारे शहर के नए विधायक शैलेष पांडेय और दूसरे हमारे महापौर किशोर राय।

शैलेष पांडेय पिछले कुछ सालों में काफी सक्रिय रहे हैं। कई सभा समारोह में नजर आते रहे। सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। शहर में हुई घटनाओं को लेकर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई देती रही। कई मोर्चों पर वे आम जनता के साथ खड़े भी नजर आए। लेकिन ये सब विधायक बनने के पहले की बातें हैं। अब जबकि वे भाजपा के दिग्गज मंत्री को पराजित कर विधायक बन चुके हैं, तब हालात एकाएक बदल से गए हैं। उनकी सक्रियता भी उतनी दिखाई नहीं पड़ रही। वे अलग थलग दिखाई पड़ रहे हैं।
इसके विपरीत महापौर किशोर राय की भूमिका है। वे पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सक्रिय दिखाई पड़ रहे। रोजाना वार्डों में जा रहे हैं। निगम के अधिकारियों से मिल रहे। हाल में ही शनिचरी बाजार में हुई आगजनी की घटना की खबर मिली तो वे तत्काल मौके पर पहुंचकर सब्जी व्यापारियों के साथ खड़े नजर आए। अब तो वे जनदर्शन भी आयोजित करने लगे हैं। विधानसभा चुनाव के पहले वे इतने सक्रिय दिखाई नहीं पड़ते थे। शायद उन्हें मंत्री का संकोच रहा हो, जिससे वे खुलकर सामने नहीं आ रहे थे। यही वजह है कि वे विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी या प्रत्याशी को कोई लाभ नहीं दिला सके। या फिर हो सकता है कि उन्होंने खुद ही अपनी हद तय कर रखी हो, और अब उस दायरे से बाहर अपनी संभावना तलाश रहे हों। ठीक भी है, क्योंकि अब यहां भाजपा के पास अगले सांसद-विधायक के लिए फिलहाल कोई चेहरा भी तो नजर नहीं आ रहा।

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