पीएम मोदी के खिलाफ डिस्लेक्सिया का मज़ाक उड़ाने पर हुई पुलिस में शिकायत

चेन्नई। The New Indian Express में छपी एक खबर के अनुसार, डिस्लेक्सिया को लेकर बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले विभिन्न संस्थाओं के संघ ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दिव्यांगों के लिए काम करने वाली राष्ट्रीय स्तर की संस्था प्लेटफॉर्म फॉर द डिसेबल्ड्स (NPRD) से संबद्ध तमिलनाडु एसोसिएशन फॉर ऑल राइट्स ऑफ डिफरेंटली एबल्ड केयरगिवर्स (TARATDAC) ने बुधवार को चेन्नई के सैदापेट पुलिस स्टेशन में इस बावत शिकायत दर्ज कराई।

The New Indian Express की पत्रकार जोहन्ना दीक्षा की यह खबर TARATDAC के राज्य महासचिव एस नंबूराजन के हवाले से कहती है कि एसोसिएशन को इस घटना के दो दिन बाद तक इस मामले की जानकारी नहीं थी। एस नंबूराजन ने पत्रकार से कहा कि “प्रधानमंत्री ने एक युवा छात्र के साथ बातचीत में डिस्लेक्सिया का मजाक उड़ाया था जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। मामले की जानकारी होने के बाद NPRD से देश भर में जुड़े संस्थाओं ने इस घटना को लेकर बयान जारी करने का फैसला किया था।

एस नंबूराजन के अनुसार, TARATDAC और NPRD ने मांग की थी कि पीएम मोदी अपनी डिस्लेक्सिया को लेकर की गई टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य के बाद से डिस्लेक्सिया से पीड़ित कई छात्र और उनके माता-पिता नाराज थे।

एस नंबूराजन के कहा- “हमने अपने बयान में इस बात का उल्लेख किया था कि अगर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगी तो हम उनके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाएंगे। और चूंकि उन्होंने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है इसलिए हमने प्राथमिक दर्ज करने का फैसला किया है।”

एफआईआर, IPC की धारा 92 (ए) के तहत दर्ज की गई:

धारा 92 (ए) के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति अगर किसी दिव्यांग व्यक्ति का जानबूझकर अपमान करता है या फिर उसे सार्वजनिक स्थल या किसी भी स्थान पर अपमानित करता है या ऐसा करने के इरादे से धमकाता है तो वह दंडनीय अपराध माना जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री द्वारा दर्ज कराई गई FIR पर ध्यान नहीं दिए जाने पर एसोसिएशन क्या प्रतिक्रिया देगा? असोसिएशन के महासचिव एस नंबूराजन ने पत्रकार से कहा- “अगर प्रधानमंत्री की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही आती है तो निश्चित रूप से विरोध प्रदर्शन होगा। दिव्यांगों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी व्यक्ति से स्वीकार्य नहीं हो सकता है, चाहे वो देश के प्रधानमंत्री ही क्यों न हो।

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