खबर का असर: बैगा आदिवासियों को अब नहीं पीना पड़ेगा कीचड़ का गंदा पानी, खबर प्रकाशित होते ही नींद से जागा प्रशासन…हैंडपंप बनवाया…नल से पानी निकलते ही बैगा आदिवासियों ने कहा-धन्यवाद खबरची….

यासीन अंसारी @khabarchi.in

बिलासपुर। शहर से लगा कोटा ब्लॉक, ग्राम पंचायत करहिकछार, और इसका आश्रित मोहल्ला डोंगरीपार….यहां वो मजलूम बैगा आदिवासी रहते हैं, जिन्हें राजनीतिक चश्मे से शायद वोट बैंक के अलावा शायद कुछ भी नहीं माना जाता…। यहां नेता और प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ चुनाव के समय ही पहुंच पाते हैं। यहां के लोग काफी दिनों से पेयजल समस्या को लेकर परेशान थे।

यहां के हैंडपंप बंद पड़े थे। तपती गर्मी में हाल ये कि कुआं तक सूख चुका है। मजबूरन यहाँ के ग्रामीण कीचड़ भरे तालाब का पानी पी रहे थे।

एक सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बामने जे जरिए पता चलते ही खबरची ने पीड़ित गांव का दौरा किया। वहां के हालात का जायजा लिया और खबरची ग्रुप में इस विकराल समस्या को 15 अप्रैल को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया।

इसका नतीजा बेहद सुखद रहा, खासकर उन मजलूम बैगा आदिवासियों के लिए, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। खबरची वेब न्यूज में खबर वायरल होते ही प्रशासन ने करहीकछार के बेगा आदिवासियों की सुध ली। कोटा जनपद के सीईओ राजेन्द्र पांडे ने तत्काल पीएचईडी विभाग को निर्देशित किया। पीएचई के सब-इंजीनियर पीके पाठक हैंडपंप मैकेनिकों को लेकर करहीकछार गांव पहुँचे। यहां एक-एक कर आसपास गांव मोहल्ले के आधा दर्जन हेंडपम्पो की मरम्मत करके उसे चालू कराया गया।

हैंडपंप से पानी निकलते ही बैगा आदिवासियों ने राहत की सांस ली। अब यहां सभी को शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। इस प्रयास के लिए यहां के ग्रामीणों ने खबरची का आभार माना।

पढें संबंधित खबर जो 15 अप्रैल को प्रकाशित हुई…

गांव-गरीब…किसान-आदिवासियों की बातें करने वाली सरकारें अदलती बदलती रहीं…मगर नहीं बदले तो यहां के हालात…कीचड़ के दूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर बैगा आदिवासी…नहाने के लिए भी कीचड़…यहां मतदान की अपील के लिए ही पहुंचते हैं नेता-अफसर

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