पुनिया ने राज्य सभा में की छत्तीसगढ़ के लिए कैरोसीन आवंटन बढ़ाने की मांग…

0 पीडीएस के अंतर्गत कैरोसीन आवंटन में कटौती का राज्यसभा में विरोध

0 छत्तीसगढ़ के कैरोसीन कोटे में कटौती बनी केन्द्र-राज्य संबंधों में बड़ी फांस

रायपुर/17 जुलाई 2019। छत्तीसगढ़ राज्य के लिये वार्षिक कैरोसीन आवंटन को बढ़ाने की मांग को लेकर राज्यसभा सांसद एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल.पुनिया ने राज्यसभा में कहा कि उज्जवला योजना के क्रियान्वयन के बाद राज्यों को पीडीएस के अंतर्गत दी जाने वाली कैरोसीन के आवंटन में बड़ी मात्रा में कटौती की गई है।

सरकार ने उज्जवला योजना के लाभार्थियों को पीडीएस कैरोसीन हेतु अपात्र कर दिया है और छत्तीसगढ़ राज्य के वार्षिक कैरोसीन आवंटन को 2015-16 के कैरोसीन 1.72 लाख किलोलीटर से घटाकर वर्ष 2018-19 में 1.15 लाख किलोलीटर कर दिया है। छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों के लिये घरेलू एलपीजी कनेक्शन होने के बाद भी कैरोसीन की आवश्यकता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य मुख्यतया आदिवासी क्षेत्र में गरीबी बहुत है। प्रदेश के 146 विकासखण्डों में से 85 अनुसूचित विकासखण्ड है। दूसरे सिलेण्डर के लिये गरीबों के लिये एकमुश्त राशि (773 रूपए) देना संभव नहीं है। छत्तीसगढ़ का भौगोलिक क्षेत्रफल 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर है जहां एलपीजी सिलेण्डरों के वितरकों की संख्या आनुपातिक रूप से भी बहुत कम है। दूर-दराज इलाकों में घर-घर जाकर एलपीजी के सिलेण्डर नहीं दिए जा रहे।

इस बाबत राज्य सरकार ने 26 मार्च, 2019 को पेट्रोलियम एंव नेचुरल गैस मंत्री एवं 29 जून, 2019 को माननीय प्रधानमंत्री जी को इस समस्या से अवगत कराया था जिस पर अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। अतः आपके माध्यम से मेरा निवेदन है कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिये कैरोसीन आवंटन में की गई कटौती को वापस ले तथा प्रतिवर्ष 1.58 लाख किलोलीटर कैरोसीन का आवंटन करें जिससे प्रदेश की गरीब एवं जरूरतमंद आबादी को पीडीएस के माध्यम से कैरोसीन मुहैया कराई जा सके।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने बताया कि एआईसीसी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल. पुनिया ने छत्तीसगढ़ के हितों और हकों की आवाज उठाते हुये राज्य सभा में शून्यकाल में छत्तीसगढ़ को कैरोसीन आवंटन बढ़ाने की मांग की और पीडीएस के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के कैरोसीन कोटे में कटौती का विरोध किया है। छत्तीसगढ़ के कैरोसीन कोटे में कटौती और मोदी सरकार के अन्य छत्तीसगढ़ विरोधी फैसले केन्द्र-राज्य संबंधों में बड़ी फांस का रूप धारण कर चुकी है।

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