महादेव हास्पिटल में मरीज की मौत पर परिजनों का गंभीर आरोप , कार्डियोलॉजित नही होने पर बिना इलाज मरीज की हुई मौत , अस्पताल प्रबंधन कहा सही किया गया ईलाज , परिजनों का आरोप बेबुनियाद ,,,

बिलासपुर     व्यापार विहार स्थित महामाया महादेव सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज की मौत को लेकर परिजनों ने हंगामा मचाया । परिजनों ने आरोप लगाया कि कार्डियोलॉजिस्ट (डॉक्टर) नहीं होने पर भी प्रबंधन ने मरीज भर्ती कर बिना इलाज किए उसे दम तोड़ने पर मजबूर कर दिया । परिजनों ने कहा है कि बिल बढ़ाने की नियत से प्रबंधन ने मरीज की बिगड़ती स्थिति देखकर भी परिजनों को सूचना नहीं दी और ना ही दूसरे अस्पताल के लिए रिफर किया । वही इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि वह सही इलाज कर रहे थे लेकिन मरीज की स्थिति पहले से ही खराब थी इस लिए उसको दिया इलाज काम नही आया और उसकी मौत हो गई ।देवरीखुर्द में रहने वाली चंद्रिका साहू (45) को सोमवार रात घर में पैर दर्द की शिकायत हुई ।तकलीफ ज्यादा बढ़ने पर परिवार वालों ने व्यापार विहार स्थित महादेव सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में लाकर भर्ती कराया । हॉस्पिटल प्रबंधन ने आईसीयू में भर्ती कर चंद्रिका साहू का इलाज शुरू किया । आज दोपहर चंद्रिका साहू की मौत हो गई मामले को लेकर परिजनों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मरीज की मौत हार्ट की समस्या से हुई है । इस मामले में परिजनों ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारी उन्हें बता रहे हैं की हार्ट की समस्या थी इस वजह से उनकी मौत हुई है और परिजनों का आरोप है कि जब कार्डियोलॉजिस्ट नहीं था तो फिर उनके मरीज को भर्ती क्यों किया गया और भर्ती करने के बाद जानकारी लगी भी तो दूसरे हॉस्पिटल रिफर क्यों नहीं किया गया । परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन मोटी रकम वसूलने के चक्कर में मरीज को भर्ती रखा और उसके स्वास्थ्य की जरा भी चिंता नहीं की यही कारण है कि 45 वर्षीय चंद्रिका साहू की मौत हो गई । इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी डॉ अशोक आशुतोष तिवारी ने बताया कि मरीज को फेफड़े में समस्या थी और हाट का एक वाल्व जाम था । मरीज की स्थिति इतनी खराब थी कि दिया गया इलाज काम नहीं आया और उसकी मौत हो गई । कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के मामले में डॉक्टर ने कहा कि कार्डियोलॉजिस्ट के द्वारा द्वारा दिए गए सलाह को मानते ही और अलग-अलग तीन डॉक्टरों की टीम की  देखरेख में ईलाज किया जिसमें मरीज का इलाज उनके काम नहीं आया । इधर परिजनों का कहना है कि जानबूझकर प्रबंधन पैसे की वसूली करने अक्सर इस तरह मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हैं और अपनी जेब भरते हैं ।

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