आख़िर कहा गए राशन और खाना बाँटने वाले दरियादिल दानदाता जो पिछले लॉक डाउन में खोज कर खाना खिलाया करते थे पूछ रहे सड़को पर रहने वाले गरीब ,,,

      भारत में  covid 19  कोरोना वायरस के प्रवेश के बाद केंद्र सरकार ने मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से लाभडाउन शुरू किया था जो अप्रैल तक चला और इस बीच पूरी तरह से व्यापार के अलावा लगभग सभी कामकाज पर पाबंदी लग गई थी । लॉकडाउन में हजारों लाखों परिवार के सामने 2 जून के खाने की समस्या आन पड़ी थी । आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को खाने के लिए घर में राशन तक नहीं था , तब समाज की दरियादिल दानदाता और सामाजिक संस्थाओं के साथ ही राजनीतिक पार्टियां, नेता , सरकारी अफसर और नगर निगम इसके अलावा कई समितियों के सदस्य और व्यक्तिगत लोगो ने सड़कों पर रहने वाले गरीबों को दो टाइम का रोजाना भोजन खिलाया करते थे इसके अलावा गरीब परिवारों को स्लम एरिया में जाकर 1 हफ्ते का राशन भी दिया करते थे लेकिन राज्य सरकार की घोषणा के बाद शहर में लगी इस माह से लॉकडाउन में ना तो अब कोई दानदाता किसी को राशन या भोजन दे रहा है और ना सामाजिक संस्थाओं के अलावा शासकीय योजनाओं के तहत पहले की तरह इस बार राशन पैकेट गरीबों को नहीं मिल रहा है अब इन योजनाओं का लाभ पाने वाले इसके अलावा दानदाताओं के द्वारा राशन और भोजन पाने वाले गरीब अब सड़कों और गलियों में नजरें टिकाए बैठे हैं कि शायद उन्हें पहले की लॉकडाउन की तरह इस बार भी राशन और खाना देने कोई आएगा , लेकिन उनका यह इंतजार एक हफ्ता बीतने के बाद भी अब तक खत्म नहीं हुआ है । ऐसे दानदाता, दरियादिल , समाजसेवक कोई भी नजर नहीं आ रहे हैं जो उन्हें राशन और भोजन दे सके । अब यह गरीब बार-बार यह पूछ रहे हैं कि आखिर वह लोग कहां गए जो पिछले लॉकडाउन में दिल खोलकर मानव सेवा कर रहे थे पिछले लाख डाउन में एक समय ऐसा भी आ गया था कि खाना लेने वालों के पास इतने सारे लोग पहुंच रहे थे कि उनके पास भोजन के पैकेट के ढेर लग जा रहे थे , लेकिन इस बार तो एक निवाला खाना भी किसी ने नहीं खिलाया । आखिर ऐसा क्या हुआ जो दानदाता दरियादिल इनकी तरफ से मुंह मोड़ लिए हैं । पिछले लॉकडाउन में तो हर गली मोहल्ले में एक समिति तैयार हो जा रही थी जो घूम घूम कर गरीबों की जानकारी लेती और उन्हें खाने के पैकेट और राशन देते थे।  क्या अब मानवता खत्म हो गई है या फिर दानदाता अब नहीं चाहते कि वे ऐसे पुण्य कामों में हिस्सा ले । आखिर उन लोगों को क्या हो गया है जो गरीबों को खाना बांट रहे थे बार-बार यही  सवाल वह गरीब कर रहे हैं जो दानदाताओं के भोजन खाना खाते थे आखिर कहां गए । अब गरीब लोगों से कह रहे हैं कि अगर कहीं खाना बटता हो तो वह जानकारी उन्हें भी  दे  ताकि वह जा कर वहां से अपने लिए भोजन ले आए। अब इन गरीब परिवारों का ख्याल रखने वाले शायद इनकी तरफ से नज़रे फ़ेर लिए है ।

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