कोरोना वायरस का इतना डर कि अब लोग तबियत खराब होने पर भी नही जाते अस्पताल , कर रहे घरेलू उपचार जिससे दवा व्यापारियों को हो रहा आर्थिक नुकसान , यह नुकसान कितना बड़ा है पढ़े पूरी रिपोर्ट,,,

बिलासपुर संभाग कोरोना काल और लॉक डाउन की वजह से जिस तरह देश के व्यापारियों की आर्थिक और व्यापारिक स्थिति खराब है उसी तरह दवा बनाने वाली कंपनी , दवा एजेंसी और मेडिकल स्टोर के संचालकों की अपनी अलग परेशानिया है । दवाई अतिआवश्यक वस्तु में आता है यही वजह है कि दवाई दुकानों को बंद तो नही किया गया लेकिन इसके दूसरे ढंग ने दवा व्यापारियों को आर्थिक नुकसान पहुचे है ।

किस तरह का नुकसान है : जिले में कोरोना काल से दवा व्यापारियों को हर महीने 140 करोड़ का नुकसान हो रहा है। तीन महीने पहले यहां प्रतिमाह 200 करोड़ का व्यवसाय होता था जो घटकर 60 करोड़ रह गया है। वर्तमान में केवल एंटीबायोटिक व जीवन रक्षक दवाओं की ही मांग है।लॉकडाउन के बाद जैसे ही देश अनलॉक हुआ था तब दवा व्यापारियों और उद्योग को आस जगी थी कि धीरे-धीरे ही सही व्यापार पटरी पर आएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हो रहा है। अनलॉक के डेढ़ माह बाद भी स्थिति जस की तस है। लॉकडाउन के दौरान दवा कारखानों में तालाबंदी के हालात बनने लगे थे। कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने से दवा निर्माता कंपनियों ने दवा बनाना ही बंद कर दिया था। जैसे ही देश अनलॉक हुआ कच्चे माल की आपूर्ति शुरू होते ही कारखानों में दवा बनना शुरू हुआ। आपूर्ति भी अब पर्याप्त मात्रा में थोक बाजार में हो रही है। लेकिन, बाजार में मांग कम है।

ओपीडी बंद, नहीं पहुंच रही पर्ची; कोरोना के बढ़ते संक्रमण से चिकित्सक भी डरे सहमे हैं। यही कारण है कि क्लीनिक नहीं खोल रहे हैें। इससे मौसमी बीमारी से लेकर अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज अस्पताल नहीं जा पा रहे हैं। इसका असर दवा बाजार में देखने को मिल रहा है।

ओपीडी बंद होने से डॉक्टर की पर्ची दवा दुकानों तक नहीं पहुंच पा रही है। लिहाजा दवाओं की मांग भी कम हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 145 नर्सिंग होम हैं, जहां चिकित्सक इलाज करते हैं। वर्तमान में ये सभी बंद हैं। कुछ विशेषज्ञ चिकित्सक ओपीडी के बजाय वर्चुअल इलाज कर रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मरीजों से मिल रहे हैं और उनकी परेशानी सुन रहे हैं। साथ ही उसी हिसाब से सलाह भी दे रहे हैं।

श्री शांता मेडिकल स्टोर ( सत्यम चौक) के संचालक रौशन ने बताया कि लॉकडाउन से अनलॉक होने के बाद शुरुआत में जरूरी व्यवसाय पटरी पर आने लगा था। ओपीडी बंद होने और संक्रमण तेजी से फैलने के कारण दवा व्यवसाय को भारी नुकसान हो रहा है।

दवा व्यवसाय में हो रहे नुकसान की बात करे तो एक अनुमान के अनुसार जिले में प्रति महीने 200 करोड़ का व्यवसाय होता था। जो घटकर 60 करोड़ रह गया है। प्रति महीने 140 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

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