सिम्स भर्ती घोटाला : जा सकती है 400 से अधिक की नौकरी, एसआईटी ने नियुक्तियों को बताया अवैध

खबरची, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में वर्ष 2012-13 में लगभग 400 पदों पर हुई नियुक्तियां एसआईटी की जांच में भी अवैध पाई गई हैं। भर्ती में भारी गड़बड़ी की गई थी, जिसकी शिकायत पर लोक आयोग जांच कर रहा है। भर्ती तत्कालीन डीन डॉ. एसके मोहंती के कार्यकाल में हुई थी।

इधर दावा-आपत्ति की सूची चिपकाई जा रही थी, उधर चहेते नियुक्ति पत्र लिए जॉइनिंग के लिए पहुंच गए:

भर्ती में खुले भ्रष्टाचार की बानगी ये, कि दिखावे के लिए एक तरफ दावा आपत्ति की सूची चस्पा की गई, तो दूसरी तरफ इन्हीं पदों के लिए अपने चहेतों को पहले से ही नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया था। मामला जगजाहिर होने पर खूब हंगामा हुआ, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में शामिल सिम्स के अधिकारियों ने राजनीतिक प्रश्रय पाकर अवैध तरीके से नियुक्तियां कर दीं। अब डॉक्टर मोहंती तो नहीं रहे, लेकिन भर्ती में खुलेआम भ्रष्टाचार करने वाले कई डॉक्टर व अधिकारी आज भी सिम्स में हैं।

शुरू से संदिग्ध रही भर्ती प्रक्रिया :-

वार्ड बॉय, चपरासी, आया, लैब टेक्नीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, सोशल वर्कर, कंप्यूटर ऑपरेटर, ऑफिस स्टाफ जैसे सैकड़ों पदों पर जब सिम्स में भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित हुआ तो क्षेत्र के बेरोजगार को काफी उम्मीदें हुईं। हजारों पात्र उम्मीदवारों ने आवेदन किए। लेकिन भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही संदिग्ध रही। कई बेरोजगारों के आवेदन तो पूर्व में ही गायब कर दिए गए।

पत्नी-बच्चे, साला-साली को नियुक्ति:-

जिन आवेदनों स्वीकार किया भी गया, तो सिर्फ दिखावे के लिए। क्योंकि बंदरबांट तो पहले ही की जा चुकी थी। क्षेत्र के पात्र युवा बेरोजगारों के साथ छल करते हुए सिम्स के अधिकारी-कर्मचारियों ने भर्ती परीक्षा और इंटरव्यू का ड्रामा किया, और इधर अपने पत्नी-बेटे, बेटी, साला-साली, अन्य रिश्तेदारों व चहेतों को नियुक्ति दे दी।

शिकायत हुई तो जांच में कोताही, अधिकारियों को सांप सूंघ गया:-

छले गए आवेदकों ने दस्तावेजों और तर्कों के साथ शासन-प्रशासन से शिकायत की तो हड़कंप मच गया। तत्कालीन कलेक्टर ने जांच शुरू करवाई, लेकिन फिर न जाने किसके आदेश पर जांच रिपोर्ट दबा दी गई। इसे लेकर कई बार मीडिया ने भी सवाल उठाया, लेकिन अधिकारियों को सांप सूंघ गया।

पीएमओ के निर्देश पर हो रही जांच :-

यहां जिला प्रशासन, राज्य शासन, या डीएमई ने इस गड़बड़ी पर जांच नहीं करवाई, तब पीड़ितों ने प्रधानमंत्री से शिकायत की। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर यहां लोक आयोग ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर जांच शुरू करवाई। अब यही जांच चल रही है।

(खबरची.in पर लगातार पढ़ें, किस तरह हुआ भर्ती घोटाला….)

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