गांव-गरीब…किसान-आदिवासियों की बातें करने वाली सरकारें अदलती बदलती रहीं…मगर नहीं बदले तो यहां के हालात…कीचड़ के दूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर बैगा आदिवासी…नहाने के लिए भी कीचड़…यहां मतदान की अपील के लिए ही पहुंचते हैं नेता-अफसर

.यासीन अंसारी @khabarchi.in

बिलासपुर। शहर से लगा कोटा ब्लॉक, ग्राम पंचायत करहिकछार, और इसका आश्रित मोहल्ला डोंगरीपार….यहां वो मजलूम बैगा आदिवासी रहते हैं, जो वोट बैंक के अलावा शायद कुछ भी नहीं…। यहां नेता और प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ चुनाव के समय ही पहुंच पाते हैं। इसलिए नहीं कि ये बेहद दुर्गम या सैकड़ों किलोमीटर दूर है, बल्कि इसलिए कि किसी के पास समय ही नहीं है इनके लिए…। गांव-गरीब…किसान-आदिवासियों की बातें करने वाली सरकारें अदलती बदलती रहीं…मगर नहीं बदले तो यहां के हालात…।

ये गांव कोटा से लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में होगा, लेकिन विकास के दायरे से कोसों दूर है…। यही वजह है कि यहां रहने वाले बैगा जनजाति के लोगों को भीषण गर्मी में पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा। उन्हें मजबूरी में दूषित पानी पड़ रहा। चुनावी बिगुल के शोर में कहीं देशभक्ति के नारे सुनाई पड़ रहे… तो कहीं गांव-गरीब और विकास की बातें… इन सबके बीच ग्रामीण आदिवासियों की रुंधी हुई आवाज़ दबकर ही रह जा रही।

गरीबों की मूलभूत जरूरतें ताक पर रख दी गई हैं, कोई सुनने वाला या समस्या का हल करने वाला नहीं दिख रहा। करहिकछार के आश्रित मोहल्ला डोंगरिपार में पीने के पानी के लिए एक हेण्डपम्प की व्यवस्था थी, लेकिन ये काफी समय से बंद पड़ा है।

गांव में एक कुआं है, लेकिन अभी भीषण गर्मी में वह भी तकरीबन सुख चुका। अब इसमें पानी नहीं, कीचड़ बचा है। कलेक्टोरेट के ऐयरकूल्ड मंथन सभाकक्ष में मिनरल वाटर पीते हुए पेयजल समस्या पर प्लानिंग करने वाले संबधित विभाग व प्रशासन के अफसरों के लिए भले ही सबकुछ ठीक चल रहा हो, लेकिन हालात इस सोच के विपरीत हैं। प्यास से तड़पते बैगा आदिवासी कुएं के इसी कीचड़ युक्त पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।

कई बार गाँव के लोगों ने सरपंच, को पानी की समस्या से अवगत कराया परंतु आश्वासन ही मिला, समस्या का हल नहीं हुआ।

यहां एक तालाब है, जिसमें पालतू मवेशियों को पानी पिलाने और व्यक्तियों को नहाने के उपयोग में लाया जाता है। इस तालाब में भी पानी नहीं बचा, सिर्फ कीचड़ है, लेकिन क्या करें…चर्मरोग की शिकायत आ रही, फिर भी कीचड़ युक्त पानी से ही नहाना पड़ रहा।

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