सिम्स में दवा का टोटा, डॉक्टरों की कमी… इधर ओपीडी पर्ची बनाने के लिए अब स्टाफ को भी लग रहे 10 रुपए…कर्मचारी संघ ने कहा-ये प्रबंधन की तानाशाही…

बिलासपुर (Khabarchi.in) बदहाल व्यवस्था, डॉक्टरों की कमी, दवाइयों के टोटे, मरीजों को परेशानी सहित कई बदइन्तेजामियों को लेकर चर्चा में रहने वाला सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार संस्थान के अधिकारी अपने ही कर्मचारियों के सवालों से घिरते नज़र आ रहे हैं। दरअसल अब सिम्स में इलाज कराने ओपीडी पर्ची बनाने के लिए कर्मचारियों को भी पैसे देने पड़ रहे हैं…। जबकि इससे पहले उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए यह पर्ची निशुल्क बनाई जाती थी।

मालूम हो कि यह पर्ची आम मरीजों के लिए भी पूर्व में निशुल्क थी। लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने अपने लोगों को फायदा पहुचाने पर्ची बनाने का काम निजी हाथों में देते हुए मरीजों पर इसके खर्च का बोझ लाद दिया था। इतना ही नहीं बल्कि बाद में इसे बढ़ाकर 5 से 10 रुपए भी कर दिया।

हालांकि इसके बावजूद सिम्स के कर्मचारियों को इससे राहत थी। लेकिन अभी कुछ दिन पहले ही प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों को भी इसके दायरे में ला दिया है। सिम्स के एमआरडी काउंटर पर बैठे ठेका कर्मचारी ने बताया, कि यह सिम्स की सहायक अधीक्षक डॉ. आरती पांडेय का आदेश है। लेकिन इस बारे में वह कोई लिखित आदेश नहीं बता पाया।इधर इस बारे में संपर्क करने पर डॉ. आरती पांडेय ने बताया, कि यह आदेश अभी का नहीं, बल्कि 2-3 साल पुराना है।

जबकि इस मामले में सिम्स के कर्मचारी बताते हैं कि इससे पहले उन्हें कभी ओपीडी पर्ची के लिए शुल्क नहीं देना पड़ा। एक तरफ शासन सभी के लिए निशुल्क इलाज के दावे करते हुए योजनाएं बना रही है, लेकिन दूसरी तरफ सिम्स प्रबंधन अपने ही कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ लाद रहा। यह गलत और तानाशाही रवैय्या है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इस बारे में डीन से मिलकर चर्चा करेंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे।

कौन क्या कहता है…

” यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी मेडिकल एलाउंस लेता है तो उसे यह शुल्क देना चाहिए। यदि नहीं लेता तो उसे मेडिकल रेम्बर्समेंट लेना चाहिए। पूरा पैसा रेम्बर्स होता है। ओपीडी की रसीद का पैसा भी।

डॉ. आरती पांडेय, सहायक अधीक्षक सिम्स।

“यदि कर्मचारियों के लिए भी ओपीडी शुल्क अनिवार्य किया गया है, तो संघ इस सम्बंध में अधिष्ठाता महोदय से मिलकर चर्चा करेगा। समस्त संस्थान अपने कर्मचारियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते हैं। वहीं सिम्स संस्थान में मरीजों की सेवा करने वाले कर्मचारियों से शुल्क लेकर आर्थिक प्रताड़ना देना गलत है। यदि यह आदेश निरस्त नहीं किया जाता तो संघ पुरजोर विरोध करेगा।”

रविन्द्र तिवारी, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जिला शाखा बिलासपुर।

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