अचानकमार क्षेत्र में भीषण जल संकट: प्यास बुझाने सूखी नदी में झिरिया खोदकर पानी तलाश रहे ग्रामीण

खबरची बिलासपुर (अनिल बम्हने)। अचानकमार टाइगर रिजर्व सतपुड़ा के 553.286 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। अचानकमार अभ्यारण्य की स्थापना 1975 में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत की गई। 2007 में इसे बायोस्फीयर घोषित किया गया और 2009 में बाघों की संख्या के लिए अचानकमार अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया। इसके बाद से अभ्यारण के भीतर गाँवों

में रहने वाले लोगों की जिन्दगी जीना मुहाल सा हो गया है।

शासन प्रसाशन से संचलित ग्रामीण विकास की योजनाएँ कागजों पर ही दिखाई देती है धरातल पर तो कुछ भी नहीं। लोग मूलभूत जरुरतें और सुविधाओं के लिए तरस रहें है।
ऐसा ही एक गाँव है महामाई ग्राम पंचायत का आश्रित मोहल्ला केरहापारा जहाँ के लोग साल के 12 महिना ही नदी में झिरिया खोद कर आपनी प्यास बुझाते हैं। इस मोहल्ले में एक हेण्डपंप है जो कई दिनो से बिगड़ा हुआ है और उसमें से पानी भी साफ नहीं आने के करण लोग उसका उपयोग नहीं कर पाते।

लोग कहते हैं कि सरपंच-सचिव सभी को समस्या से अवगत कराया लेकिन उनके द्वारा भी कोई त्वरित निदान नहीं किया गया। बल्कि यह कह कर टाल दिया जाता है कि अभ्यारण क्षेत्र होने के कारण हेण्डपंप खनन करने पर रोक है। रोड भी नहीं बनाई जा सकती, कुछ दिन बाद तो यहाँ से सभी को कहीं और जाना है।

लोगों का कहना है सरकार व्यवस्था और वन विभाग से हम लोग परेशान हैं। यहाँ कोई रोजगार नहीं, पीने को पानी नहीं, हम जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, पता नहीं कब हार जाएं।

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