कोरबा जिले के 105 गांवों को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में शामिल करने की उठने लगी मांग , सर्वदलीय मंच ने सौंपा ज्ञापन,,,

बिलासपुर पेंड्रा 15 अगस्त को जैसे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेंड्रा गौरेला और मरवाही को मिलाकर एक नए जिले बनाने की घोषणा की वैसे ही पेंड्रा मरवाही क्षेत्र से लगे कोरबा जिले के दूरस्थ वनांचल ग्राम पसान समेत आसपास के 42 ग्राम पंचायतो के लगभग 105 गांवों के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि अब अपने नजदीकी नवघोषित जिले में शामिल होने की मांग कर रहे है और सर्वदलीय मंच के बैनर तले इस मांग को अमलीजामा पहनाने की बात कह रहे है । शासन प्रशासन को ज्ञापन सौपते हुये पहल भी कर चुके है। दरअसल 15 अगस्त को प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने एक बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए बिलासपुर जिले से अलग कर पेंड्रा गौरेला और मरवाही को एक नए जिले बनाने की सौगात दी और घोषणा कर दी । घोषणा के बाद पेंड्रा गौरेला और मरवाही की 20 सालों की मांग पूरी हुई तो वही पेंड्रा मरवाही से जुड़ा हुआ कोरबा जिला का मुख्यालय से 110 किलोमीटर दूर ग्राम पसान समेत आसपास के लगभग 42 से अधिक ग्राम पंचायतों के लगभग 105 गावो के लोग और यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र को नव घोषित जिले पेंड्रा गौरेला और मरवाही में शामिल किए जाने की मांग करने लगे है पसान के रहने वाले लोगो और जनप्रतिनिधियों की माने तो उनका जिला मुख्यालय कोरबा उनके गांव से 110 किलोमीटर दूर स्थित है जबकि ब्लाक मुख्यालय पोड़ी उपरोड़ा उनके गांव की दूरी 85 किलोमीटर है वही ग्रामीण और जन प्रतिनिधियों की माने तो पेंड्रा गौरेला की दूरी उनके गांव पसान और आप पास के गांव महज 28 से 32 किलोमीटर है। वही पसान के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की माने तो जिला मुख्यालय से इतनी दूरी होने के चलते इन्हे छोटे से छोटे काम के लिये उन्हें कटघोरा कोरबा पोड़ी उपरोड़ा जाना पड़ता है जिससे समय के साथ आर्थिक बजट पर भी इसका असर पड़ता है।वही इनकी माने तो पसान वनाचंल क्षेत्र है और विकास से कोसो दूर है जो क्षेत्र का हाल 20 साल पहले था वैसा ही आज भी है।यहां तक कि स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर सिर्फ एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जहां मरीजो को तो इलाज के लिए लाया जाता है पर सिर्फ व्यवस्था ना होने के कारण तत्काल पेंड्रा के एमसीएच अस्पताल रेफर कर दिया जाता है वही हाल शिक्षा का है गांव और आसपास के क्षेत्र में प्राथमिक पढ़ाई की तो व्यवस्था है पर उच्च शिक्षा के लिये 25 किलोमीटर पेंड्रा गौरेला या फिर 90 किलोमीटर दूर कटघोरा का रुख करना पड़ता है। वही लोगो की माने तो व्यापार के साथ साथ सभी प्रकार की जरूरतें इनकी पेंड्रा गौरेला से ही पूर्ति होती है सिर्फ सरकारी कामो के लिए इन्हें कोरबा का रुख करना पड़ता है अगर उन्हें नव घोषित जिले में शामिल कर लिया जाता है तो वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।.वैसे भी भौगोलिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक व बोली भाषा सभी दृष्टिकोण से पसान और उसके आसपास के क्षेत्र को पेंड्रा जिले में जुड़ना विकास के लिए जरूरी है वही स्थानीय लोगो के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अब एक सर्वदलीय बैठक कर पेंड्रा गौरेला और मरवाही नये जिले में शामिल होने के लिए बैठकों का दौर के साथ प्रस्ताव और ज्ञापन शासन और प्रशासन को देते हुये हर संभव प्रयास करने में जुट गए है।

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