मुख्यमंत्री निवास पर हुआ हरेली पर्व का कार्यक्रम , सांस्कृतिक आयोजन के साथ ग्रामीण परिवेश की दिखी झलक ,,,

रायपुर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हरेली का त्यौहार को मनाने के लिए आज मुख्यमंत्री निवास के एक हिस्से को ग्रामीण परिवेश का स्वरूप दिया गया। मुख्यमंत्री निवास में गांव के घरों में जिस प्रकार पूजा की जाती है, उसकी झांकी तैयार की गई। गांव के घरों और बाड़े की झांकी को गोबर और मिट्टी से लीप कर तैयार किया गया। गांव के अनुरूप ही गौठान भी बनाया गया है। सजावट के लिए यहां गाड़ा बइला रखा गया । इसके अलावा किसानों के उपयोग की वस्तुएं, औजारों नांगर, गैती, रापा, कुदाली, बंसुला सहित कई औजार रखे गए।   मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने औजारों की पूजा की और गाय को लोंदी खिलायी। उन्होंने हरेली मुख्यमंत्री निवास में बनाए गए गौठान में गोधन न्याय योजना का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री निवास में गौठान की प्रतिकृति भी बनायी गई है। गोबर तौलने के लिए तराजू और चरिहा की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री निवास के कार्यक्रम स्थल को आकर्षक ढ़ंग से नांगर, कोपर, सूपा, पर्रा, कंडिल, खुमरी, डोरी, माची, पिढ़वा, जाता, धान बोरी, गेड़ी, बहरी, राचर, हंड़ी, मरकी, बाना, हुमाही, गाड़ चक्का, छेना, दुहना, लउठी, चटई से सजाया गया है। पूजा स्थल पर ग्राम देवता और तुलसी चैरा रखा गया है। रहचुल और गेड़ी का लिया आनंदमुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने हरेली के अवसर पर अपने निवास में आयोजित सांस्कृतिक समारोह के दौरान सपरिवार रहचुल (रहचुली) का आनंद लिया। वे गेड़ी भी चढ़े और पर्व से जुड़ी विभिन्न तरह की परंपराओं का निर्वहन किया। बांस गीत की स्वरलहरियां गूंजी       छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों, लोक नर्तकों, लोक गायकों ने पारंपरिक वेशभूषा में वाद्य यंत्रों एवं साज सज्जा के साथ प्रस्तुति दी। हरेली के दिन मुख्यमंत्री निवास में बांस गीत भी गूंजा। गरियाबंद जिले से बांस गीत कलाकारों को विशेष तौर पर बुलाया गया है। बांस गीत की प्रस्तुति लत्ती यादव और साथी कलाकार ने दी।  छत्तीसगढ़ की परम्परा के अनुरूप हरेली पर्व पर घर के पशुओं गाय, बैल को निरोगी रखने के लिए जड़ी-बूटी के साथ लोंदी खिलाई जाती है। हरेली के दिन घरों में गुलगुला भजिया और गुरहा चील विशेष रूप से तैयार किया जाता है। यादव समाज के लोग इस दिन गांव में घूम कर घरों में लोगों को बीमारियों से रक्षा के लिए घरों के दरवाजे पर नीम की डाली लगाते हैं। लोहार समाज के लोग अनेक प्रकार के कृषि यंत्र बनाते हैं। गांव की जरूरत के मुताबिक कृषि में उपयोग में आने वाले यंत्र इनके द्वारा ही बनाए जाते हैं। लोक और सामाजिक परम्परा के अनुरूप लोहार समाज के लोग अनिष्ट से रक्षा के लिए घरों में कील ठोंकते हैं।

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