शशिकांत कोन्हेर की कलम से: मोर गांव कछार (सेन्दरी)मां.. बड़े बिहान ले अइसनहा..झमाझम गिरत हे पानी.. के झन पूछ..! खेत-खार, बोक-बोका गे,अऊ नरवा-नार.. खदबदा गे,,,

बिलासपुर –बिलासपुर रतनपुर मार्ग पर सेन्दरी के पास बसे मेरे गांव समेत आसपास के गांवों में आज तड़के सुबह से इतनी तेज झमाझम बारिश हो रही कि बस..छन पूछ…!
वैसे तो बीते तीन-चार दिनों से यहां रोज ही बारिश हो रही है। जिसके कारण धान के खेतों में इतना लबालब पानी भर गया है कि किसानों को पानी बाहर निकालने के लिए खेतों की मूंही फोड़नी पड़ रही हैै। मजे की बात यह है कि आज उधर.. बिलासपुर शहर में लॉकडाउन खत्म होकर…अनलॉक “अर्थात” काम धाम शुरू होने वाला है। तो इधर गांवों में सुबह से हो रही धुआंधार बारिश के कारण आज खेती किसानी का काम-धाम पूरी तरह बंद रह सकता है। मानसून के आने और अच्छी बारिश होने से धान के खेतों समेत चारों ओर का नजारा ऐसा हो गया है। मानों प्रकृति ने..जहां तक नजर जा रही है…वहां तक, गहरे हरे रंग की चादर सी बिछा दी है। बहरहाल, गांव में धान की बोनी का काम तकरीबन खत्म हो चुका है। कुछ एक आलसी किसानों के खेतों में जरूर रोपा लगना बाकी है। वरना, अधिकांश किसान खाद-दवा के छिड़काव और कंधे पर लाठी रख कर सुबह शाम खेतों का फेरा लगाने में बिजी हो चुका है। किसानों का कहना है कि अब बारिश का सिलसिला कम से कम एकाध सप्ताह के लिए थंमना चाहिए.. वरना धान की फसल पर कीट प्रकोप समेत दूसरे खतरे मण्डराने लगेंगे। वहीं अनुभवी किसानों का मानना है कि हमारे क्षेत्र में असल वर्षा तो “भादो” के महीने में ही होती है। और भादो माह…राखी त्यौहार के बाद अभी अभी ही शुरू हुआ है.. लेकिन इंद्रदेव यदि आज जैसी झमाझम बारिश का सिलसिला..जारी रखने की, जिद ही पकड़ लेते हैं…तो एक पखवाड़े पहले तक ऊपर वाले से झमाझम बारिश के लिए प्रार्थना करने वाला क्षेत्र का ग्रामीण… उसी ऊपर वाले से हाथ जोड़कर शिकायती लहजे में कहता दिखेगा…भईगे…अब..बस..कर…कतका गिराबे..!

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